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चांद की ओर अकेला निकल पड़ा विक्रम

 

– इसरो की बड़ी कामयाबी

नई दिल्ली। इसरो ने चंद्रयान-3 मिशन के एक अहम पड़ाव को पार कर लिया है। चंद्रयान से अलग होकर लैंडर विक्रम अब अकेले ही चांद की ओर बढ़ चला है। तकनीकी भाषा में कहें तो प्रॉपल्शन मॉड्यूल के साथ सफर कर रहा लैंडर अलग हो चुका है। अल लैंडर विक्रम को आगे का रास्ता अकेले तय करना होगा। विक्रम लैंडर ही 23 अगस्त की शाम 5.25 बजे चांद पर लैंड करेगा।
साइंटिस्ट टी. वी. वेंकटेश्वरन ने बताया कि लैंडर के पेट के अंदर रोवर मौजूद है। धरती से अब तक लैंडर और रोवर के साथ प्रॉपल्शन मॉड्यूल ने सफर तय किया था। आज इसरो ने सेपरेशन का फैसला किया, इससे दो चीजें स्पष्ट हो जाती हैं। पहला, लैंडर मॉड्यूल का इंजन और दूसरी चीजें ठीक से काम कर रही हैं। अलग होने के बाद लैंडर अपने पैरों पर खड़ा हो गया है यानी उसके पास पूरी क्षमता है। दूसरी और सबसे महत्वपूर्ण बात लैंडर अलग होने के बाद अब वह 23 अगस्त को चांद पर लैंडिंग करेगा।
विज्ञान प्रसार के अंतरिक्ष वैज्ञानिक वेंकटेश्वरन ने बताया कि इसरो ने पिछले फेल्योर का स्टडी कर पूरी तैयारी के साथ चंद्रयान-3 को भेजा है। इसे ऐसे समझ लीजिए कि लैंडर के पास चार इंजन हैं। उसमें से दो इंजन भी काम करेंगे तो कोई दिक्कत नहीं होगी।