Search
Close this search box.

मोदी सरकार के दो संकटमोचक ‘नौकरशाह’, जिन्होंने लिखी ‘अनुच्छेद 370’ खत्म करने की ‘स्क्रिप्ट’

अनुच्छेद 370' खत्म करने की 'स्क्रिप्ट'

नई दिल्ली केंद्र सरकार की टॉप नौकरशाही में कैबिनेट सचिव राजीव गौबा और केंद्रीय गृह सचिव अजय कुमार भल्ला, बहुत खास हैं। इन्हें लगातार सेवा विस्तार मिल रहा है। ऐसा भी नहीं है कि इन पदों पर रहे सभी पूर्व नौकरशाह, सरकार की ऐसी कृपा के पात्र रहे हैं। मोदी सरकार के इन दो ‘किरदारों’ के बारे में कहा जाता है कि इन्होंने जम्मू कश्मीर में ‘अनुच्छेद 370’ खत्म करने की ‘स्क्रिप्ट’ लिखी थी। ‘अनुच्छेद 370’ की समाप्ति के बाद जम्मू कश्मीर में जो परिस्थितियां सामने आईं, उनसे निपटने में भी इन नौकरशाहों का अहम योगदान रहा है। मोदी सरकार में ‘संकटमोचक’ रहे, इन दोनों नौकरशाहों को अब इनाम भी मिल रहा है।

कैबिनेट सचिव राजीव गौबा को तीसरा सेवा विस्तार मिला है तो वहीं गृह सचिव अजय भल्ला को चौथा सेवा विस्तार प्रदान किया गया है। कैबिनेट सचिव राजीव गौबा, झारखंड कैडर के 1982 बैच के आईएएस अधिकारी हैं। उन्हें 2019 में दो साल के लिए कैबिनेट सचिव नियुक्त किया गया था। इससे पहले वे केंद्रीय गृह सचिव थे। 2021 में राजीव गौबा को पहला सेवा विस्तार मिला। अगस्त 2022 में उन्हें दोबारा से एक साल का सेवा विस्तार प्रदान किया गया। अब उन्हें तीसरा सेवा विस्तार मिला है। वे तीस अगस्त 2024 तक कैबिनेट सचिव के पद पर काम करते रहेंगे। कैबिनेट की नियुक्ति समिति (एसीसी) ने एआईएस (डीसीआरबी) नियम, 1958 के तहत राजीव गौबा को एक वर्ष की अवधि का सेवा विस्तार प्रदान किया है। यह कार्यकाल पूरा करने के बाद वे देश में सबसे लंबे समय तक कैबिनेट सचिव के पद पर कार्य करने वाले नौकरशाह बन जाएंगे।

जम्मू कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम का मसौदा तैयार करने में कैबिनेट सचिव राजीव गौबा की अहम भूमिका रही है। चूंकि वे कैबिनेट सचिव बनने से पहले गृह सचिव के पद पर कार्यरत थे। जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाने का जो ड्राफ्ट तैयार किया गया, उसमें गौबा का खास रोल रहा है। केंद्रीय सचिवालय, पीएमओ और विभिन्न मंत्रालयों के बीच बेहतर समन्वय बनाने में राजीव गौबा को विशेष महारत हासिल है। केंद्र सरकार में ज्वाइन करने से पहले उन्होंने, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के बोर्ड में भारत का प्रतिनिधित्व किया था। जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 की समाप्ति के बाद वहां पर केंद्रीय मंत्रियों के दौरे का जो शेड्यूल तैयार किया गया, उसमें भी राजीव गौबा की खास भूमिका रही।

असम-मेघालय कैडर के 1984 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी अजय कुमार भल्ला को अगस्त 2019 में केंद्रीय गृह सचिव के पद पर नियुक्त किया गया था। भल्ला को नवंबर 2020 में सेवानिवृत्त होना था, लेकिन उससे पहले ही केंद्र सरकार ने अक्टूबर 2020 में उन्हें एक साल का सेवा विस्तार देकर उनका कार्यकाल 22 अगस्त 2021 तक बढ़ा दिया। गत वर्ष उन्हें तीसरा सेवा विस्तार दिया गया।

उनका कार्यकाल अगस्त 2023 तक है। उन्हें केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का विश्वस्त माना जाता है। अब उन्हें 22 अगस्त 2024 तक चौथा सेवा विस्तार प्रदान किया गया है। अनुच्छेद 370 की समाप्ति के बाद जम्मू कश्मीर की परिस्थितियों को संभालने में अजय भल्ला का विशेष योगदान रहा है। जम्मू कश्मीर, नक्सल प्रभावित क्षेत्र और उत्तर पूर्व को लेकर जो कई अहम फैसले लिए गए, उनका ड्रॉफ्ट भल्ला ने ही तैयार किया था।

केंद्र में अफसरों को सेवा विस्तार देने बाबत कैबिनेट सचिवालय से सेक्रेटरी ‘सिक्योरिटी’ के पद से रिटायर पूर्व आईपीएस एवं सीआईसी रहे यशोवर्धन के मुताबिक, ये एक्सटेंशन नहीं दिया जाना चाहिए। ये उस वक्त तो ठीक है, जब देश में आपातकाल हो। सरकार को ट्रांसफर पोस्टिंग करने का समय ही नहीं मिला हो।

रिटायरमेंट पर बैठे किसी अधिकारी को सेवा विस्तार देने से कई दूसरे अधिकारियों के हित प्रभावित होते हैं। कई अफसरों की वरिष्ठता खत्म हो जाती है। क्या कुछ अफसरों को राजनीतिक स्वार्थों के चलते सेवा विस्तार मिल रहा है। नौकरशाह का अपना भी कोई हित रहता होगा। लोगों को यह जानने का अधिकार है कि किसी व्यक्ति को एक्सटेंशन मिला है तो उसके पीछे क्या कारण हैं। उस व्यक्ति में क्या खासियत है। सरकार को उस बारे में लोगों को बताना चाहिए। नौकरशाहों को लोगों के टैक्स से वेतन मिलता है, इसलिए उन्हें यह मालूम होना चाहिए कि किस अधिकारी को सरकार क्यों सेवा विस्तार दे रही है।