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जन्म-मृत्यु पंजीकरण विधेयक 2023 बना कानून

राष्ट्रपति ने दी मंजूरी

नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र में मंगलवार को जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक लोकसभा से पारित होने के बाद अब राष्ट्रपति से मंजूरी मिल गई है। कानून और न्याय मंत्रालय ने इस संबंध में एक अधिसूचना भी जारी की।
इसमें कहा गया है कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कानून को मंजूरी दे दी है। इसके बाद अब यह कानून बन गया है। इस विधेयक को मानसून सत्र के दौरान संसद के दोनों सदन पहले ही पारित कर चुके हैं। सदन में पेश किए जाने के दौरान विपक्षी सांसदों ने इस पर विरोध दर्ज कराया था।
एक अगस्त को संसद के निचले सदन लोकसभा में जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक 2023 पारित हो गया था। वर्तमान में जन्म और मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969 के जरिए जन्म और मृत्यु के पंजीकरण किया जाता है। जन्म और मृत्यु का पंजीकरण समवर्ती सूची के अंतर्गत आता है। इसका मतलब है कि संसद और राज्य विधानसभाएं दोनों इस विषय पर कानून बनाने के लिए सक्षम हैं। 2019 तक, जन्म के पंजीकरण का राष्ट्रीय स्तर 93 फीसदी था और मृत्यु पंजीकरण 92 फीसदी था। विधि आयोग (2018) ने जन्म और मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969 में विवाह पंजीकरण को शामिल करने की सिफारिश की थी।
अब जबकि यह कानून बन गया है तो कई मामलों में जन्म प्रमाण पत्र का उपयोग अनिवार्य होगा। इससे ऐसे सभी मामलों में किसी व्यक्ति की उम्र और जन्म स्थान निर्धारित करने के लिए इसे एकमात्र मान्य प्रमाण के रूप में माना जाएगा। जन्म प्रमाण पत्र न होने का मतलब यह होगा कि कोई व्यक्ति वोट नहीं दे सकता, या स्कूल में प्रवेश, शादी या सरकारी नौकरी के लिए आवेदन नहीं कर सकता।